नए अनाज के भण्डारण के लिए एफसीआई तैयार

फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) द्वारा गेंहू की खरीद तो जारी है पर जिस प्रकार से गेंहू का पिछले स्टॉक को देखते हुए अधिकारी इसे भण्डारण के अनुसार बेचने की दिशा में भी प्रयासरत हैं जिससे की भण्डारण की समस्या उत्पन्न न हो. जैसा की ज्ञात है गोदामों में 2.10 करोड़ टन के बफर स्टॉक से तीन गुना अधिक अनाज है. ऐसे में एजेंसी नए अनाज के भण्डारण के लिए जगह बनाने के साथ साथ पिछले स्टॉक को थोक खरीदारों को बेचने की योजना बना रही है. एफसीआई ने सभी फूड कंपनियों और आटा मिलों के लिए ओपन मार्केट सेल स्कीम शुरू की है. आमतौर पर पहले एजेंसी सीजन के लिए गेहूं की खरीदारी पूरी होने के बाद अनाज की बिक्री करती है, लेकिन भण्डारण के अनुसार जगह की व्यवस्था बनाने के लिए इस बार यह काम काफी पहले शुरू कर दिया है। यह जानकारी सरकारी अधिकारियों ने दी है.

देश में अभी अनाज स्टोरेज कैपेसिटी 8.8 करोड़ टन की है. सरकार के पास अभी 5.9 करोड़ टन अनाज है. एफसीआई इस बीच गेहूं की खरीदारी भी कर रही है, जिससे स्टोरेज की समस्या बढ़ने की आशंका है. फूड मिनिस्ट्री के एक बड़े अधिकारी ने बताया, ‘स्टोरेज कैपेसिटी कम पड़ती जा रही है। 10 मई 2019 तक सरकार ने इस सीजन में 2.9 करोड़ टन गेहूं खरीदा था, जबकि उसने कुल 3.57 करोड़ टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है. गेहूं की सरकारी खरीद 30 जून तक जारी रहेगी। ऐसे में नई फसल के भंडारण को लेकर सरकार की परेशानी काफी बढ़ सकती है.’

उन्होंने बताया, ‘हम गेहूं को एक ऊंचे मचान पर ढंक कर रखते हैं, ताकि बारिश और नमी से इसका बचाव किया जा सके. हालांकि, इस तरह से स्टोरेज करने पर 40 पर्सेंट तक अनाज के खराब होने की आशंका होती है।’ स्टोरेज की समस्या को सुलझाने के लिए सरकार ने प्रोक्योरमेंट सीजन के दौरान ही गेहूं और धान की बिक्री का फैसला किया है.

अधिकारी ने बताया, ‘हम आमतौर पर गेहूं की खरीदारी पूरी होने के बाद ओएमएसएस स्कीम शुरू करते हैं। हालांकि स्टोरेज की जगह कम पड़ने की वजह से इस बार हम बीच में भी थोक खरीदारों को अनाज की बिक्री शुरू कर चुके हैं. गेहूं की बिक्री 31 मार्च 2020 तक की जाएगी. हालांकि, ओएमएसएस के दौरान गेहूं की अधिक पैदावार वाले राज्यों में इसकी बिक्री नहीं की जाएगी.’ 

एफसीआई ने ई-ऑक्शन के जरिये आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, तेलंगाना, राजस्थान, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में अतिरिक्त गेहूं और धान की बिक्री के लिए टेंडर दिए हैं। सरकार ने 1 करोड़ टन गेहूं और 50 लाख टन धान खुले बाजार में बेचने की मंजूरी दी है। इस साल 1 सितंबर तक गेहूं बेचने के लिए कीमत 2,080-2,245 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है, जबकि धान के लिए भाव 2,785 रुपये रखा गया है. फूड मिनिस्ट्री के अधिकारी ने बताया, ‘1 अक्टूबर से धान की बिक्री की कीमत सरकार के नए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर निर्भर करेगी. एफसीआई द्वारा उठाये जाने वाले इस कदम से किसानों के साथ साथ उद्योगों को भी सही समय पर सामान उपलब्ध हो पायेगा और किसानों को भी सही समय पर उनका भुगतान किया जा सकेगा उसके साथ ही अनाजों के बर्बाद होने की दिशा में सकारात्मक पहल की शुरुआत होगी.   

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